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पहली बार नवजात शिशॠको बà¥à¤–ार आने पर, इस लकà¥à¤·à¤£ को न करें नजरअंदाज, तà¥à¤°à¤‚त à¤à¤¾à¤—ें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° के पास
पहली बार पेरेंट बनने पर नà¤-
नठà¤à¤•à¥â€à¤¸à¤ªà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤‚स मिलते हैं। वहीं शिशॠको पहली बार बà¥à¤–ार होने पर à¤à¥€ नà¥â€à¤¯à¥‚ पेरेंटà¥à¤¸ की जान निकल जाती है।
हर किसी के लिठपेरेंटिंग à¤à¤• अलग à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤ªà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤‚स होता है और इस सफर में हर पेरेंट को अलग-अलग चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना करना पड़ता है। अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ को नौ महीने तक गरà¥à¤ में रखना और उसे पहली बार अपनी गोद में उठाना, ये कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होते हैं जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ नहीं जा सकता है।पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी के नौ महीनों के उतार-चढ़ाव के बाद शिशॠका जनà¥â€à¤® होने पर आपकी पेरेंटिंग का सफर शà¥à¤°à¥‚ होता है। जब नवजात शिशॠबीमार पड़ता है, तो पेरेंटà¥à¤¸ की टेंशन और जिमà¥â€à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ दोनों ही बढ़ जाती हैं।शिशॠको बà¥à¤–ार में तड़पते हà¥à¤ देखना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है लेकिन इस समय आपको परेशान होने या हड़बड़ी दिखाने की बजाय इस परेशानी से निपटने के लिठतैयार रहने की जरूरत होती है।
​बà¥à¤–ार कैसे चेक करें
नवजात शिशॠके सिर पर अपनी हथेली के पीछे वाला हिसà¥â€à¤¸à¤¾ लगाकर देखें। अगर माथा गरम लग रहा है, तो थरà¥à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° से फीवर चेक करें। आप बचà¥â€à¤šà¥‡ में बà¥à¤–ार के अनà¥â€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ जैसे कि चिड़चिड़ापन, सà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥€ और बेवजह थकान को à¤à¥€ नोटिस करें।
​सही थरà¥à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° चà¥à¤¨à¥‡à¤‚
यदि आपका बचà¥â€à¤šà¤¾ 3 महीने से कम उमà¥à¤° का है, तो उसका बॉडी टेंपरेचर 100.4 डिगà¥à¤°à¥€ फारेनहाइट से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं होना चाहिà¤à¥¤ अगर टेंपरेचर इससे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है, तो शिशॠको तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° के पास लेकर जाà¤à¤‚।शिशॠके लिठरेकà¥â€à¤Ÿà¤² थरà¥à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° का ही इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से पहले रेकà¥â€à¤Ÿà¤² थरà¥à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° को गरà¥à¤® और साबà¥à¤¨ के पानी में जरूर धो लें। सही रीडिंग आने के लिठà¤à¤• मिनट का इंतजार करें।
​आप हैं सबसे सही
अगर टेंपरेचर बà¥à¤–ार जितना à¤à¥€ नहीं है, तो बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ पर धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ दें और उसी के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² करें। शिशॠको पहली बार बà¥à¤–ार होना, पेरेंटà¥à¤¸ को डरा देता है कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ इसके बारे में जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कà¥à¤› पता ही नहीं होता है।
शिशॠमें सà¥à¤¸à¥â€à¤¤à¥€, थकान और चिड़चिड़ेपन के साथ उलà¥â€à¤Ÿà¥€, रैश और देर तक न रो पाने जैसे बिहेवरियल बदलाव à¤à¥€ देखें।
​डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° की सलाह है जरूरी
शिशॠको बà¥à¤–ार होने पर, बेहतर होगा कि आप डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से सलाह लें। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से पूछे बिना शिशॠको कोई दवा न दें कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° ही बताठपाà¤à¤‚गे कि किस उमà¥à¤° के शिशॠको किस दवा की कितनी खà¥à¤°à¤¾à¤• देनी चाहिà¤à¥¤
नवजात शिशॠबहà¥à¤¤ छोटा होता है और उसकी इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी तो अà¤à¥€ बनी à¤à¥€ नहीं होती है इसलिठआप खà¥à¤¦ से कोई दवा देने की बजाय à¤à¤• बार डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से जरूर बात कर लें।
​नोट करें ये बात
यहां दी गई सलाह और सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को डॉकà¥â€à¤Ÿà¤°à¥€ इलाज का विकलà¥â€à¤ª नहीं माना जा सकता है। इसलिठशिशॠको बà¥à¤–ार होने पर डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से बात करनी जरूरी है। इस मामले में कोई लापरवाही न बरतें।
जब नवजात शिशॠको बà¥à¤–ार हो, तो मां उसके पास ही रहे। आप शिशॠको अपनी गोद में रखें ताकि बचà¥â€à¤šà¥‡ को थोड़ा सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और सà¥à¤•ून महसूस हो सके। इस समय बचà¥â€à¤šà¤¾ चिड़चिड़ा हो सकता है या रो सकता है। सिरà¥à¤« मां ही à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥â€à¤šà¥‡ को शांत कर सकती है।
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